भारत में लोगों के घरों में संग्रहित हैं 25 हजार टन सोना, जो जीडीपी के 40 प्रश हिस्सा हैं / रिपोर्ट : स्पर्श देसाई
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Report by Sparsh Desai/Photos & Video by...Google. ©GoldDust News Channel.
मुंबई, / रिपोर्ट : स्पर्श देसाई
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के MD पी. सोम सुंदरम् ने हाल के दिनों में यह कहा था कि " भारत के नागरिकों के पास करीब 24000 से 25000 टन सोना घरोंं में संग्रहित हैंं । इन सोने को अंतरराष्ट्रीय दामों के आधार पर गिनती करें तो 25,000 सोने का सोने का मूल्य 1135 अरब डॉलर होता हैंं । जो देश के वर्तमान वित्त वर्ष 2019 के डीजीपी के 40% प्रतिशत तक होता हैंं । केंद्र की रिजर्व बैंक ने 608. 8 टन और 10% की आयात ड्यूटी को मद्देनजर देश में सोने का स्टॉक हाल के दिनों में बढ़ गया हैंं । हाल के वर्षों में सोने की मांग कमजोर रहने के बावजूद सोने के स्टॉक में वृद्धि देखी गई हैंं । इसके पीछे का मुख्य कारण परंपरागत तरीके से होती सोने की खरीदारी हैंं ।
सोम सुंदरम आगे कहा था कि हमने इस मुद्दे पर 2 साल पहले अभ्यास चालू किया था । जिसका निष्कर्ष यह निकला था हैं कि हाउसहोल्ड्स स्टाक को 23000 से 24000 टन सोना भारत के घरों में संग्रहित हैंं । हाल के दिनों में 24000 से 25000 टन होने का अंदाज हैंं । विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में फिर से तेजी आने से सोने में फिर से आकर्षण बना हैंं, हालांकि गोल्ड स्कीम्स, मुद्रीकरण, बोंड़स् सोवरिन सिक्कें आदि साल 2015 के आखिर में लांच हुए थे और उनको मनचाहा प्रतिसाद मिला नहीं था । इन हर एक स्कीम्स को देश के वार्षिक प्रयोग में लाने जाने वाले सोने का सिर्फ दो प्रश का हिस्सा माना जाता हैंं । प्रोत्साहन देने से इसके कलेक्शन में वृद्धि होने की संभावना हैंं । सरकार भी जरूरी आयात को अंकुश में रखने के लिए कड़े कदम उठाती हैं । जिसके मद्देनजर ऐसी योजनाओं का अमली करण करने में लाने से ऐसी योजनाओं से देश के व्यापार और राजकीय नुकसानी पर असर भी होगा । सोने में 10% की आयात ड्यूटी लागू होने से आयात मंद होती हैंं और गैर कानूनी तरीके से आने वाले सोने का जोखिम बना रहता हैंं । मार्च की तिमाही के वक्त भारतीय सोने की मांग में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन संसार की मांग 7% गिरी होने की वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल बात करता हैं । भारत में वर्ष 2019 में 750 से लेकर 850 टन सोने की डिमांड रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष 2018 में 760 टन रही थी ।
सोमासुंदरम में आगे कहा था कि रुपया मजबूत होने से और सोने में स्थानीय स्तर पर भाव दाम गिरने से मार्च महीने की तिमाही में सोने की डिमांड में 5% की वृद्धि होकर 159 हुई थी, क्योंकि शादियों के मौसम में खरीदारी, अक्षय तृतीया और फसलों में दाम बढ़ने से जून की तिमाही में सोने की डिमांड के आंकड़े से ज्यादा अच्छा रहने का अनुमान हैंं । हाल में हवामान विभाग ने यह संभावना जताई थी इस साल मानसून सामान्य रहेगा जिससे ग्रामीणों के अर्थ तंत्र में सोने का वर्चस्व बने रहने का अनुमान हैंं । नोटबंदी के बाद देश में सोने की डिमांड गिरी गिरकर साल 2016 में 666 टन रही थी, हालांकि वर्ष 2018 में इस डिमांड में रिकवरी होने से 760 हुई थी ।
रिपोर्ट : स्पर्श देसाई √●Gold Dust News Channel●के लिए...

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