*भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड:राजेश एक्सपोर्ट्स ने किया ₹15.5 लाख करोड़ का फर्जीवाड़ा,LIC समेत लाखों रिटेल निवेशक डूबे*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 

*भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड:राजेश एक्सपोर्ट्स ने किया ₹15.5 लाख करोड़ का फर्जीवाड़ा,LIC समेत लाखों रिटेल निवेशक डूबे*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। सोने के आयात-निर्यात और ज्वेलरी व्यवसाय से जुड़ी दिग्गज कंपनी"राजेश एक्सपोर्ट्स गोल्ड रिफाइनिंग एंड गोल्ड ज्वेलरी" (Rajesh Exports) ज्वैलरी कंपनी पर ₹15.5 लाख करोड़ ($15.5 Trillion) के रिकॉर्ड तोड़ वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है। आकार के मामले में यह घोटाला साल 1992 के ऐतिहासिक हर्षद मेहता स्कैम से लगभग 300 गुना बड़ा बताया जा रहा है । बाजार नियामक सेबी (SEBI) की जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को चमकाने के लिए 99% तक फर्जी रेवेन्यू (राजस्व) दिखाया और विदेशों में काल्पनिक खदानें (Mines) खड़ी कर दीं। इस खुलासे के बाद कंपनी के शेयर 80% से अधिक टूट चुके हैं। जिससे देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC और लाखों छोटे खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की गाढ़ी कमाई डूब गई है। 


अब देखें कि यह कहां से शुरू हुआ?तो सामने आई यह जानकारी। स्विट्जरलैंड अधिग्रहण से शुरू हुआ यह मायाजाल। राजेश एक्सपोर्ट्स का कारोबार साल 2015 के बाद तेजी से चमका। जब कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता ने स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी "वेलकेमबी एसए" Valcambi SA का अधिग्रहण किया। इस टेकओवर के बाद कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू आसमान छूने लगा। हर वित्तीय मोर्चे पर कंपनी 'ग्रीन फ्लैग' (सुरक्षित) नजर आ रही थी।  जिससे प्रभावित होकर भारतीय निवेशकों ने इसमें भारी निवेश किया। अब कहानी में ट्विस्ट आया। ₹15.5 लाख करोड़ का रेवेन्यू और SEBI की एंट्री हुई। असली मोड़ तब आया जब कंपनी ने वित्तीय साल 2021 से 2025 के बीच कुल ₹15.5 लाख करोड़ का भारी-भरकम रेवेन्यू घोषित किया। एक आम शेयरहोल्डर को कंपनी के बही-खातों (Books of Accounts) पर शक हुआ क्योंकि बुक्स में हजारों करोड़ रुपये का''आउटस्टैंडिंग अमाउंट''(ग्राहकों से वसूला जाने वाला पैसा) पिछले कई सालों से पेंडिंग दिख रहा था। शेयरहोल्डर की शिकायत पर जब सेबी (SEBI) ने मामले की गहराई से फोरेंसिक ऑडिट और जांच शुरू की तो कॉर्पोरेट जगत के होश उड़ गए।
 


दौरान घोटाले का मॉडस ऑपेरंडी (Modus Operandi) सामने आई। सेबी की जांच में कंपनी की वित्तीय हेराफेरी की दो बड़ी परतें खुलीं। 99% फर्जी रेवेन्यू और राउंड ट्रिपिंग की बातें सामने आई। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा था कि यह रेवेन्यू उसकी विदेशी सब्सिडरीज (सहयोगी कंपनियों) को बेचे गए माल से आया है लेकिन सेबी ने जब विदेशों में जांच की तो पता चला कि वहां ऐसा कोई रेवेन्यू अस्तित्व में ही नहीं था। कंपनी असल में अपने ही सोने को अपनी ही विदेशी फर्जी कंपनियों को घुमाकर बेच रही थी (राउंड ट्रिपिंग)। इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी को सिर्फ बीच का''कमीशन'' मिल रहा था लेकिन राजेश एक्सपोर्ट्स ने बही-खातों में कमीशन के बजाय पूरे सोने की मूल कीमत (Actual Gold Value) को ही अपना रेवेन्यू दिखाकर देश को गुमराह किया। अब काल्पनिक सोने की खदानें की कहानी जाने तो कंपनी ने अपनी बुक्स में दावा किया था कि उसने विदेशों में हजारों करोड़ रुपये की सोने की खदानें (Mines) खरीदी हैं। जब नियामक ने इन संपत्तियों के मालिकाना हक के दस्तावेज मांगे तो कंपनी एक भी वैध डाक्यूमेंट पेश नहीं कर सकी यानि खदानें सिर्फ कागजों पर थीं। इसमें LIC और आम निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। इस फ्रॉड के उजागर होते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और स्टॉक क्रैश होकर 80% तक नीचे आ गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी गाज देश के आम रिटेल निवेशकों पर गिरी है।




 चौंकाने वाली बात यह है कि देश की सबसे भरोसेमंद सरकारी संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)जैसे बड़े प्रमोटर्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने भी इस कंपनी के दावों पर भरोसा करके भारी हिस्सेदारी खरीदी थी। जो अब मिट्टी में मिल चुकी है। दौरान बाजार विशेषज्ञों की सीख महत्वपूर्ण हैं।"यह घोटाला भारतीय निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। किसी भी कंपनी के केवल बाहरी मुनाफे या बड़े रेवेन्यू के आंकड़ों को देखकर अंधा विश्वास न करें। निवेश करने से पहले कंपनी के डीप फंडामेंटल्स, कैश फ्लो और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की पूरी फॉरेंसिक रिसर्च करना बेहद जरूरी है।"(Photos Courtesy Social media)

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